खींच ही लेगा दोस्ती की तरफ़
उस के दुश्मन भी हैं उसी की तरफ़
एक पतवार नाव की ख़ातिर
इक नज़र मेरी ज़िंदगी की तरफ़
इक झलक उस हसीन चेहरे की
इक क़दम और शाइ'री की तरफ़
आप का साथ जिस को मिल जाए
क्यूँ ही देखेगा वे घड़ी की तरफ़
बच्चा बोला ग़ुबारे वाले से
एक चक्कर मिरी गली की तरफ़
जब भी फूलों का ज़िक्र होता है
ज़ह्न जाता है आप ही की तरफ़
ये कोई पूछने की बात है यार
कैसे आए हो शाइ'री की तरफ़
— Ahmad Azeem















