जब्र और इख़्तियार से आगे
कब गए इस दयार से आगे
एक आईन है तुलू-ओ-ग़ुरूब
जैसे पतझड़ बहार के आगे
कौन सी मम्लिकत की सरहद है
जिस्म-ओ-जाँ के दयार से आगे
ख़ामुशी का मुहीब सहरा है
सब्ज़ा-ज़ार-ए-पुकार से आगे
बारिशों से खिली है हरियाली
शहर-ए-गर्द-ओ-ग़ुबार से आगे
— Ahmad Azeem















