चारपाई पे आ उतारी है
ज़िन्दगी ज़िंदा लाश भारी है
आप दुख दे रहे है रो रहा हूँ
और ये फ़िलहाल जारी है
रोना लिखा गया रोते है
जिम्मेदारी तो जिम्मेदारी है
मेरी मर्ज़ी जहाँ भी सर्फ़ करूँ
ज़िन्दगी मेरी है, तुम्हारी है
दुश्मनी के हजारो दर्जे है
आख़िरी दर्जा रिशतादारी है
— Afkar Alvi















