क्या रखा है ज़िंदगी में
वक़्त की इस बे-रुख़ी में
आप का ही ज़िक्र करते
आज-कल हम शा'इरी में
रौशनी में खो गए जो
वो मिले फिर तीरगी में
फ़र्क़ ज़्यादा है नहीं कुछ
दोस्ती में दुश्मनी में
तजरबा है कह रहा हूँ
दुख बहुत हैं आशिक़ी में
— Adarsh Akshar
वक़्त की इस बे-रुख़ी में
आप का ही ज़िक्र करते
आज-कल हम शा'इरी में
रौशनी में खो गए जो
वो मिले फिर तीरगी में
फ़र्क़ ज़्यादा है नहीं कुछ
दोस्ती में दुश्मनी में
तजरबा है कह रहा हूँ
दुख बहुत हैं आशिक़ी में
Other ghazal from the same pen
Shers of udas.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling