"लौट आना"
सुख उन्हें भी कब मिला है
पर पिता ने ये लिखा है
देख तू चिंता न करना
इस समय धीरज सा धरना
है निशा का घोर डेरा
दूर दिखता है सवेरा
भूलना तुम ये नहीं पर
काल की गति है निरंतर
कुछ यहाँ रुकता नहीं है
कल कहीं था कल कहीं है
याद रखना बात मेरी
सुख का आना और देरी
ये नियम कब टूटता है
हर किसी पर बीतता है
प्राण है तू बस हमारा
आँख का ओझल सितारा
धैर्य तू क्यूँ खो रहा है
इस तरह क्यूँ रो रहा है
प्राण अपने खो पड़ूँगा
तू जो रोया रो पड़ूँगा
हारने का भय न करना
दुर्ग़मों की जय न करना
शैल ही तेरा पता हो
पर नदी को रास्ता हो
ये न ढूँढो क्या कहाँ है
मैं यहाँ हूँ माँ यहाँ है
बोझ यदि भारी लगे तो
यदि थकन हारी लगे तो
हर तपन को भूल जाना
दुख मिले तो लौट आना
दुख मिले तो लौट आना















