तेरे ख़याल से फूटा था ख़्वाब कहते हैं
तुझे हयात का लुब्ब-ए-लुबाब कहते हैं
चुना है तू ने मुझे ज़िन्दगी के दामन में
मुझे ये लोग तेरा इंतिख़ाब कहते हैं
इसी का नाम रवानी है बर-सर-ए-दरिया
इसी को दश्त में प्यासे शराब कहते हैं
गुनाहगार है उस के सो उस की महफ़िल में
हम उस के हुस्न को उस का नक़ाब कहते हैं
— Abbas Qamar















