किसे फ़ुर्सत-ए-मह-ओ-साल है ये सवाल है
कोई वक़्त है भी कि जाल है ये सवाल है
न है फ़िक्र-ए-गर्दिश-ए-आसमाँ न ख़याल-ए-जाँ
मुझे फिर ये कैसा मलाल है ये सवाल है
वो सवाल जिस का जवाब है मेरी ज़िन्दगी
मेरी ज़िन्दगी का सवाल है ये सवाल है
मैं बिछड़ के तुझ से बुलंदियों पे जो पस्त हूँ
ये उरूज है कि ज़वाल है ये सवाल है
— Abbas Qamar















