यार तुम बद-नसीब कैसे हो
बाप है फिर गरीब कैसे हो
आप अटके शिया और सुन्नी में
फिर ख़ुदा के क़रीब कैसे हो
ख़ुद की थाली में छेद कर डाला
यार इतने अजीब कैसे हो
बूढ़े बरगद की छाँव में हो तुम
बेटे फिर ग़म-नसीब कैसे हो
तुम से पूरी हुई कहानी ये
दोस्त हो तुम रक़ीब कैसे हो
— Aatish Indori















