राह जब भी तवील हो जाए
हर क़दम एक मील हो जाए
लटके रहना सलीब पर तय है
ज़िन्दगी जब वकील हो जाए
ख़ुशनुमा ख़्वाब आएगा तय हो
दिन कभी जब तवील हो जाए
एक मुद्दत से आस है ‘आतिश’इश्क़ उस को भी फ़ील हो जाए
हौसला गर जवाँ रहे ‘आतिश’
उम्र फिर तो तवील हो जाए
— Aatish Indori















