भोर होने को है हर रात को यूँँ समझा है
मुश्किलों से भरे हालात को यूँ समझा है
शांत इस तरह ही होती है पहाड़ी नद्दी
हर उबलते हुए जज़्बात को यूँ समझा है
मेरा किरदार कहानी में अभी है ज़िंदा
बा'द मुद्दत की मुलाक़ात को यूँ समझा है
इम्तिहानों के लिए ज्ञान मिला है आतिश
ज़िन्दगी में मिली हर मात को यूँ समझा है
— Aatish Indori















