सबब बे-सबब याद करता रहा मैं
बयाबान आबाद करता रहा मैं
सुना शे'र ग़ालिब का फ़रहाद पर जब
तो फ़रहाद फ़रहाद करता रहा मैं
हवाएँ बनी ज़ुल्म की दास्ताँ-गो
परिंदों की इमदाद करता रहा मैं
सर-ए-आम दुश्मन करे अब तमाशा
तो इरशाद इरशाद करता रहा मैं
ज़माना बड़ा सख़्त गुज़रा है 'आमिर'
ज़माने से फ़रियाद करता रहा मैं
— Aamir Ali















