नज़र में अदा हो हया से भरी हो

ख़मोशी भी तेरी सदास भरी हो

समुंदर है लहरें बला से भरी हो
कशिश में हवाएँ वबास भरी हो

न कोई मुरव्वत न कोई रिआयत
ये क्या ज़िंदगी बद-दुआ से भरी हो

ज़माना बदलता रहा है मगर तुम
सुना है कि अब भी अना से भरी हो

मुझे और कुछ भी नहीं चाहिए बस
मेरी जेब तेरी वफ़ा से भरी हो

— Aamir Ali

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