किसे बे-ख़बर ढूँढ़ता है
इधर हूँ उधर ढूँढ़ता है
वो मुझ से मिला कुछ यूँ जैसे
बयाबाँ बसर ढूँढ़ता है
नए शहर में हर मुसाफ़िर
किराए का घर ढूँढ़ता है
नज़र से नज़र तो मिली पर
निशाना जिगर ढूँढ़ता है
सफ़र पर जो निकले तो पाया
सफ़र हम सफ़र ढूँढ़ता है
वो साक़ी तो हाज़िर है हर-दम
ये मय-कश पहर ढूँढ़ता है
— Aamir Ali















