इल्म-दाँ हो रिंद हो या बावरा क्या देखना

चारा-गर तू घाव भर किस का भरा क्या देखना

ज्ञान देते उन अमीरों से वो कासा बोल उठा
भूख में रोटी दिखा सोना ख़रा क्या देखना

ताज पर जब चाँदनी बरसे तो जन्नत सा लगे
बात यूँ तो ठीक है पर मक़बरा क्या देखना

अल्मिया हो सानेहा हो या कोई धोखाधड़ी
सर पटक कर एक दीवाना मरा क्या देखना

मशवरे फिर मशवरे फिर मशवरे लेते रहे
क्या बचा इस
में तुम्हारा मशवरा क्या देखना

मीरो-ग़ालिब के हवाले से हुई है शा'इरी
लखनऊ दिल्ली है कहती आगरा क्या देखना

तीन रंगों को बराबर का दिया दर्जा 'असद'
कितना केसरिया है कितना है हरा क्या देखना

— Asad Akbarabadi

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