गुनाहों की किसी फ़ेहरिस्त में जब नाम होते हैं

जिएँ कैसे अगर सर पे कई इल्ज़ाम होते हैं

लुटा देते हैं सब अपना जिन्हें कुछ मिल नहीं पाता
बुरा कहते उन्हें है लोग, जो नाकाम होते हैं

दिखाते हैं उन्हें जब लोग अपनी कामयाबी को
कहाँ जाते हैं वो, जो शख़्स फिर नाकाम होते हैं

उन्हें सब जानते हैं और उन का नाम लेते हैं
मिले मंज़िल अगर तो नाम, या बदनाम होते हैं

हमें इक शख़्स जो वो मिल न पाया, नाम से उस के
ज़रा सा ही मगर हम भी चलो बदनाम होते हैं

तुम्हें ये भी नहीं मालूम कितनी है हमें चाहत
दिलाना भी यक़ीं चाहें मगर नाकाम होते हैं

— Umashankar Lekhwar

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Justaju Shayari

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