बोल सको तो रावलपिंडी तक जाती है
ये देखेंगे कब तक दिल्ली तक जाती है
करते रहिए ये तो है मालूम सभी को
मेहनत की आवाज़ बुलंदी तक जाती है
ओलम्पिक में कैसे जीतें सोना चाँदी
जब लड़कों की सोच ही लड़की तक जाती है
अब मानव को कभी न दिखती अपनी ग़लती
सबकी नज़र पराई ग़लती तक जाती है
— Suryapratap swtantra















