क्या मिला खफ़ा हो के
मुझ से यूँ जुदा हो के
मुझ को मैं ने ढूँढा है
ख़ुद ही लापता हो के
क़ैद में रहा ज़िंदा
मर गया रिहा हो के
मैं वजूद में आया
तुझ में ही फ़ना हो के
दर्द हो गया उर्यां
मुझ में ला दवा हो के
ख़ुद की मंज़िलें ढूँढी
तेरा रास्ता हो के
हम बहुत हुए रुसवा
तुझ से आशना हो के
— SHABAN NAZIR















