ये सच है मैं उस पर मरता हूँ
इस से ज़ियादा क्या कर सकता हूँ
मेरे सामने ज़िक्र न हो उस का
उस के ज़िक्र से मैं रो पड़ता हूँ
तू ने मुझ को दोस्त ही समझा बस
मैं तो तुझ से मुहब्बत करता हूँ
तुझ को तेरी ख़ुशी मुबारक हो
मुझे इजाज़त दे मैं चलता हूँ
— Saurabh Chauhan 'Kohinoor'















