मुझे बेचैन रखती हैं हमेशा बस यही बातें

किसे अब कह रहा होगा वो सब मुझ से कही बातें

मैं कहती हूँ बहुत कुछ पर सभी को साफ़ दिखता है
मैं कहना चाहती हूँ बस फ़क़त तेरी वही बातें

मैं चाहूँ तो तेरे चेहरे से ये पर्दा गिरा दूँ पर
मुहब्बत से डरेगा ये जहाँ सुन कर कही बातें

तू जिस का हाथ था
में कल मिला था मुझ को राहों में
वो कितना है तेरा ये देख बतला कर सही बातें

— Sakshi Saraswat

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