किसी के साथ हूँ पर हूँ किसी की आँखों में
मैं धूल झोंकता हूँ ज़िंदगी की आँखों में
बिछड़ के मुझ से वो ख़ुद को तलाश करने लगी
तलाश भी किसी और आदमी की आँखों में
खुले गगन के तले नाचने का मन है बस
किसी का ख़्वाब नहीं मोरनी की आँखों में
— Rishabh Sharma
मैं धूल झोंकता हूँ ज़िंदगी की आँखों में
बिछड़ के मुझ से वो ख़ुद को तलाश करने लगी
तलाश भी किसी और आदमी की आँखों में
खुले गगन के तले नाचने का मन है बस
किसी का ख़्वाब नहीं मोरनी की आँखों में
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