Prit
Prit
Ghazal

"प्रीत" ये मुहब्बत जब बे-हिसाब होती है

लब गुलाब, क़ातिल आँखें शराब होती हैं

तुम वहाँ कभी जो बीमार होते हो, जानाँ
हालतें यहाँ मेरी भी ख़राब होती हैं

प्यार के बिना सजदों में असर नहीं आता
सारी कोशिशें ही नाकामयाब होती हैं

प्यार गर बड़ी शिद्दत से निभाया जाए तो
बा'द उस के नफ़रत भी लाज़वाब होती है

— Prit

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