मुझे है ख़बर सब के दम रुक रहे हैं

कि दहलीज़ पर ही क़दम रुक रहे हैं

किसी फ़ायदे पर सज़ा काट लूँ मैं
सुना है तिरे भी सितम रुक रहे हैं

मिरा ही मकाँ रौशनी से अलग क्यूँ
कहीं तो ख़ुदा के करम रुक रहे हैं

हवा तू बताना मुझे हाल घर का
जहाँ भी दुबारा सनम रुक रहे हैं

— Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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