बड़ी हसरतों से सँवारा गया है
हाँ ज़न्नत से हम को उतारा गया है
सुनो जंगलों की सदाएँ कभी तुम
जला के परिंदों को मारा गया है
तड़पना तुम्हारा मुझे भा रहा है
चलो कुछ तो है जो तुम्हारा गया है
करें कैसे उन की ज़बाँ का भरोसा
हमें कह के हाँ फिर नकारा गया है
— Najib Murad















