अक्सर दोनों चुप रहते हैं माँ और मैं
सब कहते हैं इक जैसे हैं माँ और मैं
जिन के अंदर उन की साँसें अटकी हैं
बाबा के वो दो तोते हैं माँ और मैं
हम रिश्ते दौलत से आगे रखते थे
इसीलिए सब से पीछे हैं मैं और माँ
राज़ी राज़ी बँटवारे से सब ख़ुश हैं
कोने में चुप-चाप खड़े हैं माँ और मैं
हम को तो सबका कहना मानना है ना
घर के सब से छोटे बच्चे हैं माँ और मैं
— Mukesh Guniwal "MAhir"















