अब तो वो बस तुम पर ग़ज़लें कहता है
पहले से कुछ बेहतर ग़ज़लें कहता है
पहले वो कुछ काम और काज भी करता था
अब तो बैठ के दिनभर ग़ज़लें कहता है
हर रात क्या तुम उस के ख़्वाब में होती हो
रोज़ सवेरे उठकर ग़ज़लें कहता है
— Mukesh Guniwal "MAhir"
पहले से कुछ बेहतर ग़ज़लें कहता है
पहले वो कुछ काम और काज भी करता था
अब तो बैठ के दिनभर ग़ज़लें कहता है
हर रात क्या तुम उस के ख़्वाब में होती हो
रोज़ सवेरे उठकर ग़ज़लें कहता है
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