मुझे इस तरह से गिराया गया है

कि जैसे दिए को बुझाया गया है

अकेले बचे हो फ़क़त इस वजह से
शजर से परिंदा उड़ाया गया है

रुका ही नहीं है कोई कुर्ब मेरे
रुका गर है कोई रुलाया गया है

उसे ढूंढता हूँ दिनों रात अब मैं
जिसे रात दिन बस सताया गया है

कभी आग जिस ने बुझायी थी मेरी
ख़ुदाया उसे ही जलाया गया है

बरोज़े क़यामत शफ़ाअत करेंगे
वही जिन को तन्हा सताया गया है

कहद आ रहे हैं कहीं ज़लज़ले भी
फ़क़ीरों को दर से उठाया गया है

— Talib akbarabadi

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