ग़ैर कहे पागल मुझ को तो बुरा लगता है

तुम पागल कहती हो तो अच्छा लगता है

हर क़ीमत पर चाहा है तुम को ख़ुश देखूँ
तुम्हीं कहो ये प्यार नहीं तो क्या लगता है

एक तुम्हीं बस सच्ची लगती हो दुनिया में
बाक़ी तो ये सारा जहाँ झूठा लगता है

ऐसे ही तुम्हारे ख़्वाबों में खोए रहना
लोगों को अब ये मेरा पेशा लगता है

देख तुम्हारा हँसता चेहरा हँस देता हूँ
मुझ को चेहरा कम शीशा ज़्यादा लगता है

मैं तो तुम को ले कर बिल्कुल संजीदा हूँ
अच्छा तुम को इस बारे में क्या लगता है

— Pushpendra Mishra

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