उस परी की याद आनी थी हमें
सोग की बातें बतानी थी हमें
ख़्वाब ज़ेर-ए-तेग़ रख कर चल दिए
मुफ़लिसी घर की मिटानी थी हमें
मौत से उलझे इसी उम्मीद में
बात उन की आज़मानी थी हमें
उस गली को छोड़ कर हम आ गए
जिस गली से सरगिरानी थी हमें
फूल मिलते थे हमें भी डेट पर
बात कुछ और थी, जवानी थी हमें
साँप पाले आस्तीं में जानकर
दोस्ती में चोट खानी थी हमें
जाम आधा छोड़ कर सुनने लगे
याद तो पूरी कहानी थी हमें
— Happy Srivastava 'Ambar'















