बात पुरानी ता'ने मार रही है
याद किसी की ता'ने मार रही है
मेरे अंदर चीख रही ख़ामोशी
और उदासी ता'ने मार रही है
फैल गई तन्हाई कमरे में मिरे
हर इक खिड़की ता'ने मार रही है
हार हुई जबसे यार मुहब्बत में
हर इक लड़की ता'ने मार रही है
हर रोज़ बिठाकर अपने पास मुझे
इक तन्हाई ता'ने मार रही है
उस की शादी तखलीफ़ नहीं मेरी
यार विदाई ता'ने मार रही है
सिगरेट जलाते हैं तिरी यादों से
दियासलाई ता'ने मार रही है
— Rohit Gustakh















