Chetan
Chetan
Ghazal

ज़माना हमें बे-सहारा न समझे

ख़ुदा पर भरोसा गवारा न समझे

उसे कब मिला है जिसे भीड़ घेरे
उसे रब दिखा जो इजारा न समझे

किसी को मोहब्बत नहीं है वफ़ा से
मिरे हिज्र को तू गुज़ारा न समझे

जिसे मान कर ज़िंदगी जी रहे थे
वही मौत का था इशारा न समझे

बिछड़ना ज़रूरी नहीं था मगर तू
मोहब्बत नहीं है असारा न समझे

रहा है मुझे याद वो ज़िन्दगी भर
नफ़ा थी मोहब्बत ख़सारा न समझे

— Chetan

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