आसमानों से हमारा जब तलक नाता रहा
हर सितारा दोस्त था हर चाँद घर आता रहा
कैसे तुझ को मान लूँ मैं दोस्त अपना ऐ सनम
मैं जिसे खोता रहा हूँ तू उसे पाता रहा
ख़ुद पे गुज़रे हादसों का ज़िक्र तक छेड़ा नहीं
जाने किस का गीत था जो उम्र भर गाता रहा
— Aditya Singh aadi















