जब वो मुझ को कहती थी एक शे'र सुनाओ
उस के उपरी लब को चूम के हट जाता था
उस के ज़ेहन में क्या आता था?
तैश में आ कर कहती थी - “शे'र मुकम्मल कौन करेगा?
सानी मिसरा कौन पढ़ेगा?”
— Zubair Ali Tabish
उस के उपरी लब को चूम के हट जाता था
उस के ज़ेहन में क्या आता था?
तैश में आ कर कहती थी - “शे'र मुकम्मल कौन करेगा?
सानी मिसरा कौन पढ़ेगा?”
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