माहौल बे-मज़ा है तेरे प्यार के बग़ैर
कैसे पिए शराब कोई यार के बग़ैर
कैसे पिए शराब कोई यार के बग़ैर
ये इश्क़ भी है कितना अनोखा मु'आमला
इक़रार के बग़ैर न इनकार के बग़ैर
फूलों से गर बहार ने भर भी दिया तो क्या
दामन मेरा उदास रहा ख़ार के बग़ैर
फ़ुर्सत मिले तो पूछ कभी उन का हाल भी
जो लोग जी रहे हैं तेरे प्यार के बग़ैर
उस शोख़ से बिछड़ के 'ज़फ़र अपनी ज़िंदगी
जैसे मकान हो कोई दीवार के बग़ैर
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पत्थर कहा गया कभी शीशा कहा गया
दिल जैसी एक चीज़ को क्या क्या कहा गया
दिल जैसी एक चीज़ को क्या क्या कहा गया
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दिन को भी इतना अँधेरा है मिरे कमरे में
साया आते हुए डरता है मिरे कमरे में
साया आते हुए डरता है मिरे कमरे में
ग़म थका-हारा मुसाफ़िर है चला जाएगा
कुछ दिनों के लिए ठहरा है मिरे कमरे में
सुब्ह तक देखना अफ़्साना बना डालेगा
तुझ को इक शख़्स ने देखा है मिरे कमरे में
दर-ब-दर दिन को भटकता है तसव्वुर मेरा
हाँ मगर रात को रहता है मिरे कमरे में
चोर बैठा है कहाँ सोच रहा हूँ मैं 'ज़फ़र'
क्या कोई और भी कमरा है मिरे कमरे में
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