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इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है
यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है
यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है
इश्क़ है इश्क़ कोई खेल नहीं बच्चों का
वो चला जाए जिसे मात से डर लगता है
मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता
रोज़ बँटती हुई ख़ैरात से डर लगता है
हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी
अब बदलते हुए हालात से डर लगता है
दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर'
घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है
Read Fullवो चला जाए जिसे मात से डर लगता है
मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता
रोज़ बँटती हुई ख़ैरात से डर लगता है
हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी
अब बदलते हुए हालात से डर लगता है
दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर'
घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है
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तुम्हारे काम अगर आए मुस्कुराने में
तो कोई हर्ज नहीं मेरे टूट जाने में
तो कोई हर्ज नहीं मेरे टूट जाने में
फ़रोख़्त हो गई हर शय जो दिल मकान में थी
मैं इतना ख़र्च हुआ हूँ उसे कमाने में
मैं अपनी जान से जाऊँगा है ये सच लेकिन
उसे भी ज़ख़्म तो आएँगे आज़माने में
वो एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत न बिन सका मुझ से
हज़ार बार मिटा हूँ जिसे बनाने में
तुम्हें तो सिर्फ़ ख़बर है चराग़ जलने की
हमारे हाथ जले हैं उसे जलाने में
तुम्हारे वस्ल की मस्ती थी और मय-ख़ाना
शराब ले के गया था शराब-ख़ाने में
इमारतों में मोहब्बत का देवता है वो
हमारे हाथ कटे हैं जिसे बनाने में
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