जाने वाले से राब्ता रह जाए
घर की दीवार पर दिया रह जाए
घर की दीवार पर दिया रह जाए
इक नज़र जो भी देख ले तुझ को
वो तिरे ख़्वाब देखता रह जाए
इतनी गिर्हें लगी हैं इस दिल पर
कोई खोले तो खोलता रह जाए
कोई कमरे में आग तापता हो
कोई बारिश में भीगता रह जाए
नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए
ख़्वाब ऐसा कि मुँह खुला रह जाए
झील सैफ़-उल-मुलूक पर जाऊँ
और कमरे में कैमरा रह जाए
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वैसे मैं ने दुनिया में क्या देखा है
तुम कहते हो तो फिर अच्छा देखा है
तुम कहते हो तो फिर अच्छा देखा है
मैं उस को अपनी वहशत तोहफ़े में दूँ
हाथ उठाए जिस ने सहरा देखा है
बिन देखे उस की तस्वीर बना लूँगा
आज तो मैं ने उस को इतना देखा है
एक नज़र में मंज़र कब खुलते हैं दोस्त
तू ने देखा भी है तो क्या देखा है
इश्क़ में बंदा मर भी सकता है मैं ने
दिल की दस्तावेज़ में लिखा देखा है
मैं तो आँखें देख के ही बतला दूँगा
तुम में से किस किस ने दरिया देखा है
आगे सीधे हाथ पे एक तराई है
मैं ने पहले भी ये रस्ता देखा है
तुम को तो इस बाग़ का नाम पता होगा
तुम ने तो इस शहर का नक़्शा देखा है
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ज़ख़्मों ने मुझ में दरवाज़े खोले हैं
मैं ने वक़्त से पहले टाँके खोले हैं
मैं ने वक़्त से पहले टाँके खोले हैं
बाहर आने की भी सकत नहीं हम में
तू ने किस मौसम में पिंजरे खोले हैं
बरसों से आवाज़ें जमती जाती थीं
ख़ामोशी ने कान के पर्दे खोले हैं
कौन हमारी प्यास पे डाका डाल गया
किस ने मश्कीज़ों के तस्में खोले हैं
वर्ना धूप का पर्बत किस से कटता था
उस ने छतरी खोल के रस्ते खोले हैं
ये मेरा पहला रमज़ान था उस के बग़ैर
मत पूछो किस मुँह से रोज़े खोले हैं
यूँ तो मुझ को कितने ख़त मौसूल हुए
इक दो ऐसे थे जो दिल से खोले हैं
मन्नत मानने वालों को मालूम नहीं
किस ने आ कर पेड़ से धागे खोले हैं
दरिया बंद किया है कूज़े में 'तहज़ीब'
इक चाबी से सारे ताले खोले हैं
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले
उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले
तुम चाहते हो तुम से बिछड़ के भी ख़ुश रहूँ
या'नी हवा भी चलती रहे और दिया जले
क्या मुझ से भी अज़ीज़ है तुम को दिए की लौ
फिर तो मेरा मज़ार बने और दिया जले
सूरज तो मेरी आँख से आगे की चीज़ है
मैं चाहता हूँ शाम ढले और दिया जले
तुम लौटने में देर न करना कि ये न हो
दिल तीरगी में घेर चुके और दिया जले
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा
वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा
मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या न आऊँ
मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
मैं जिस कोशिश से उस को भूल जाने में लगा हूँ
ज़ियादा भी अगर लग जाए तो हफ़्ता लगेगा
मिरे हाथों से लग कर फूल मिट्टी हो रहे हैं
मिरी आँखों से दरिया देखना सहरा लगेगा
मिरा दुश्मन सुना है कल से भूका लड़ रहा है
ये पहला तीर उस को नाश्ते में जा लगेगा
कई दिन उस के भी सहराओं में गुज़रे हैं 'हाफ़ी'
सो इस निस्बत से आईना हमारा क्या लगेगा
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इस एक डर से ख़्वाब देखता नहीं
जो देखता हूँ मैं वो भूलता नहीं
जो देखता हूँ मैं वो भूलता नहीं
किसी मुंडेर पर कोई दिया जिला
फिर इस के बा'द क्या हुआ पता नहीं
मैं आ रहा था रास्ते मैं फूल थे
मैं जा रहा हूँ कोई रोकता नहीं
तिरी तरफ़ चले तो उम्र कट गई
ये और बात रास्ता कटा नहीं
इस अज़दहे की आँख पूछती रही
किसी को ख़ौफ़ आ रहा है या नहीं
मैं इन दिनों हूँ ख़ुद से इतना बे-ख़बर
मैं बुझ चुका हूँ और मुझे पता नहीं
ये इश्क़ भी अजब कि एक शख़्स से
मुझे लगा कि हो गया हुआ नहीं
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