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आप रोने लगे हैं सरगम में
इस क़दर खो गए हैं मातम में
इस क़दर खो गए हैं मातम में
हिज्र का दुख, विसाल के आँसू
लुत्फ़ है दो नदी के संगम में
इश्क़ इक मोजज़ा सा लगता है
फूल खिलते हैं ज़र्द मौसम में
शब की तारीकियाँ बताएँगी
कितने आँसू छिपे हैं शबनम में
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