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Kashif Hussain Kashif

Top 10 of Kashif Hussain Kashif

Kashif Hussain Kashif

Top 10 of Kashif Hussain Kashif

    ज़ाहिद तेरे ख़याल में किस ने ख़लल है दी
    बाक़ी रहा ये दिल में कही बस मलाल है
    Kashif Hussain Kashif
    10
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    तुम्हारे है दामन में बस जी-हुज़ूरी
    ये सारी रिफ़ाक़त तो हम को मिली है
    Kashif Hussain Kashif
    9
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    मेरे अपने सभी ज़ख़्म भरने लगे
    इश्क़ में किस क़दर हम उभरने लगे

    याद तेरी जुनूँ में जब आती रही
    ख़ाक बन कर फ़ज़ा में बिखरने लगे

    मैं ने देखा मुहब्बत में मजनूँ भी फिर
    ख़्वाब की बंदगी में निखरने लगे


    जब से माँ ने कभी हाथ अपना रखा

    हादसे पास आ कर ठहरने लगे
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    Kashif Hussain Kashif
    8
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    मैं ही था पागल कहीं ख़ुद मेरे ही इमकान से
    तोड़ जाता दिल मेरा ही कितने इत्मीनान से
    Kashif Hussain Kashif
    7
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    आग तू ने क्या लगाई दिल में तो जान ए जिगर
    फिर हुआ क्या शहर मेरा दिल जलों का हो गया
    Kashif Hussain Kashif
    6
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    रास्ते को सभी कर के ज़ीशान तू
    नूर का ही कही फिर था पैमान तू

    मेरा अपना गिरेबान तो चाक है
    दिल की बस्ती का ख़ाली सा मीज़ान तू

    मेरे हालात से मुत्मइन हैं सभी
    मेरे किरदार से अब है अंजान तू

    मैं तो साहिल से फिर लौट कर भी कहीं
    उजड़ी कश्ती का ही फिर है सामान तू
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    Kashif Hussain Kashif
    5
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    शाम कितनी थी शबीना यार तेरे साथ में
    क्या हुआ जो था मेरा ही हाथ तेरे हाथ में
    Kashif Hussain Kashif
    4
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    कर के बेबाक बातें वो मुझ से यूँ फिर
    देखता रह गया मरहला वो मेरा
    Kashif Hussain Kashif
    3
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    "सफ़र"
    हर रोज़ नींद की आग़ोश से निकल कर
    मैं तन्हा जाता हूँ घर से निकल कर

    फिर यूँ कि कुछ इंतिज़ार होता है
    उन रास्तों से मुश्किल से प्यार होता है

    हर लम्हे बस वही याद आती है
    वो शहर में बिताई हुई शाम याद आती है

    हम थे कभी भीड़ का एक हिस्सा
    अब महज़ बन कर रह गया है एक क़िस्सा

    बहुत मुश्किल था अपने शहर से हिजरत करना
    मगर ये काम भी ज़रूरी था मुझ को करना

    रास्ते में बहुत कुछ नया–नया सा दिखता है
    मगर अब तुझ सेा कहाँ कुछ दिखता है

    अब तो मुसलसल जारी रहता है सफ़र
    मगर अफ़सोस तू इस मुसाफ़िर के हाल से है बे-ख़बर
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    Kashif Hussain Kashif
    2
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    सफ़र
    हर रोज़ नींद की आग़ोश से निकल कर
    मैं तन्हा जाता हूँ घर से निकल कर

    फिर यूँ के कुछ इंतिज़ार होता है
    उन रास्तों से मुश्किल से प्यार होता है

    हर लम्हे बस वही याद आती है
    वो शहर में बिताई हुई शाम याद आती है

    हम थे कभी भीड़ का एक हिस्सा
    अब महज़ बन कर रह गया है एक क़िस्सा

    बहुत मुश्किल था अपने शहर से हिजरत करना
    मगर ये काम भी ज़रूरी था मुझ को करना

    रास्ते में बहुत कुछ नया–नया सा दिखता है
    मगर अब तुझ सेा कहाँ कुछ दिखता है

    अब तो मुसलसल जारी रहता हैं सफ़र
    मगर अफ़सोस तू इस मुसाफ़िर के हाल से है बे-ख़बर
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    Kashif Hussain Kashif
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Dharmesh basharDharmesh basharSaahirSaahirDanish BalliaviDanish BalliaviGulfam AjmeriGulfam AjmeriAnubhav GurjarAnubhav GurjarSurendra Bhatia "Salil"Surendra Bhatia "Salil"Irshad Siddique "Shibu"Irshad Siddique "Shibu"Saurabh Chauhan 'Kohinoor'Saurabh Chauhan 'Kohinoor'Manoj DevduttManoj DevduttDr Bhagyashree JoshiDr Bhagyashree Joshi