बाप का सर से जो साया क्या उठा
ग़म के साए हक़ जताने लग गए
ग़म के साए हक़ जताने लग गए
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कि इतनी मेहरबानी बस ख़ुदा कर दे
अमीरों को तू बस इक दिल अता कर दे
अमीरों को तू बस इक दिल अता कर दे
ग़रीबों को निवाला नइँ दे सकता गर
तो दे कर मौत तू उन का भला कर दे
लहू से शहर लतपथ देखे नइँ जाते
मुहब्बत शहर में मौला अता कर दे
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