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मिरी सूनी सी रातों में तुम्हारा ही सहारा है
निभाए थे कभी जो उन ही वादों का पिटारा है
निभाए थे कभी जो उन ही वादों का पिटारा है
तिरे जैसा कोई क्या होगा जो मिल जाए तो लाना
बची है रात ग़म की बस अभी दिन ही गुज़ारा है
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कभी पीछे रही तुम दिल दुखाने से
मुझे तुम जान आई हो फ़लाने से
मुझे तुम जान आई हो फ़लाने से
तभी तुम ने अदब से बात क्या कर ली
तो ख़ुद को ही जुदा जाना ज़माने से
तुम्हारी याद में दिन रात रोया हूँ
भुलाया अब इसे झट इक बहाने से
मिरे रुख़्सार पे सुर्ख़ी लगी ऐसी
कि रख के होंठ भूली हो हटाने से
उसे मैं हाल दिल का अब बताता ही
कि तब तक वो हुई पीछे निभाने से
मुझे फिर से दुबारा याद आया है
बहुत दुख हैं मता-ए-जाँ बनाने से
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वो हम में से ही थे कोई जिन्होंने दिल दुखाया है
अभी कुछ दिन ही पहले निर्भया को भी रुलाया है
अभी कुछ दिन ही पहले निर्भया को भी रुलाया है
अगर वो आज ख़ुद ये देख लेते शे'र क्या कहते
कि अब ग़ालिब के कलकत्ते में तुम ने ख़ूॅं बहाएा है
तुम्हारे घर में माँ-बीवी बहन-बेटी नहीं होती
ये कर के नाम तुम ने सारे मर्दों का डुबाया है
तुम्हें ख़ुद शर्म आनी चाहिए ममता ये कहने में
कि औरत हो के तुम ने फिर उसी का हक़ मिटाया है
सुनो ऐ लड़कियो चीखें हज़ारों साल इस जैसी
तुम्हें हक़ माँगना ऐसी ही चीखों ने सिखाया है
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