इधर तुम दिखोगी, उधर तुम दिखोगी
अभी इश्क़ का है असर, तुम दिखोगी
अभी इश्क़ का है असर, तुम दिखोगी
गली में बहुत भीड़ भरने लगी है
गली में उड़ी है ख़बर, तुम दिखोगी
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इश्क़ मुझ को किसी से हुआ भी नहीं
मसअला है पर इतना बड़ा भी नहीं
मसअला है पर इतना बड़ा भी नहीं
फरवरी आ गई है दोबारा मगर
मेरे महबूब का कुछ पता भी नहीं
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इश्क़ महँगा पड़ रहा है तुम को यामिर
ज़ख़्म किश्तों में अभी तक मिल रहे हैं
ज़ख़्म किश्तों में अभी तक मिल रहे हैं
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चाहिए क्या और आफ़त के लिए
इश्क़ काफ़ी है क़यामत के लिए
इश्क़ काफ़ी है क़यामत के लिए
जान कर कुछ ग़लतियाँ करता था मैं
दिल तरसता था शिकायत के लिए
इश्क़ तेरा बन गया है वो मिसाल
लोग देंगे जिस को लानत के लिए
हम ने उस से भी मुहब्बत कर ली है
जो न क़ाबिल था अदावत के लिए
ख़ुश-मिज़ाजी को तिरे समझा था इश्क़
माफ़ कर दे इस हिमाक़त के लिए
मौत भी है हिज्र जैसी कैफ़ियत
क्या सज़ा दें फिर बग़ावत के लिए
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