बद-हवासी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है
ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है
जल रही है शब, सहर भी जल रहा है
जलते हैं आदम कि घर भी जल रहा है
आग नफ़रत की लगाई जाने किसने
शहर जलता है ग़ुजर भी जल रहा है
किसी और के निगाहों की बनी है नूर जो तू
मिरी नज़रों में तुझ को ये ज़माना ढूँढता है
बनाता है मुझे पागल तेरा झुमका
मेरे दिल को करे घायल तेरा झुमका
उड़ा दे होश मेरे जब पहन आए
करे मुझ को तेरा क़ायल तेरा झुमका
रिझाए हिज्र में हम को हमेशा ही
तेरी बिंदी तेरा काजल तेरा झुमका
गरजता है बड़ा बे-हद बरसता है
फ़लक के काले वो बादल तेरा झुमका
तेरी हर चीज़ को लिक्खा ग़ज़ल में जाँ
तेरी चूड़ी तेरी पायल तेरा झुमका