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तुम्हारा इश्क़ साहब काग़ज़ी है
तभी हर बात पे नाराज़गी है
तभी हर बात पे नाराज़गी है
भला मेहबूब किस का रूठता है
अगर रूठा तो समझो दिल-लगी है
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हसीन लड़की से दिल लगाना भी इक ख़ता है मुझे पता है
अगर सज़ा में मिले क़ज़ा तो अलग मज़ा है मुझे पता है
अगर सज़ा में मिले क़ज़ा तो अलग मज़ा है मुझे पता है
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