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Mohammad Aquib Khan

Top 10 of Mohammad Aquib Khan

Mohammad Aquib Khan

Top 10 of Mohammad Aquib Khan

    दिल से कैसा है ये मालूम नहीं, पर वो शख़्स
    शक्ल से साहिब-ए-ईमान नज़र आता है
    Mohammad Aquib Khan
    10
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    कुछ मुसव्विर हैं जो ता'बीर बना देते हैं
    देख मुझ को तेरी तस्वीर बना देते हैं

    फ़क्र कैसे न करें बाज़ु-ए-हिम्मत पर हम
    लोहा पिघला के ये शमशीर बना देते है

    पूछे जब भी कोई जन्नत के मआ'नी हम से
    हम वहाँ नक़्शा-ए-कश्मीर बना देते है
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    Mohammad Aquib Khan
    9
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    आशिक़-ए दीन-ए-ग़ज़ल के लिए कु़रआँ है वो
    अब जिसे मीर का दीवान कहा जाता है
    Mohammad Aquib Khan
    8
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    मेरे माँ बाप अनपढ़ हैं मगर वो
    मेरे चेहरे को पढ़ना जानते हैं
    Mohammad Aquib Khan
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    रक़्स करते हैं सारे बंदर हैं
    वो जो ऊपर है ना मदारी है
    Mohammad Aquib Khan
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    कभी सहराओं में भी बारिश हो
    वो भी देखें कभी मुझे छत से
    Mohammad Aquib Khan
    5
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    तुम अपना दीन दिखाओ उसे, मोहब्बत भी
    गले लगाओ मगर पहले तुम सलाम करो
    Mohammad Aquib Khan
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    छीन कर हक़ किसी का जश्न-ए-बहारा कर लें
    इस से बेहतर है दो रोटी पे गुज़ारा कर लें

    एक लम्हे को सही रेत पे तो आती है
    हम समुंदर से भला कैसे किनारा कर लें

    डूबना तैरना सब आप के ही ऊपर है
    आप गर चाहें तो तिनके को सहारा कर लें

    जिस्म से जान कभी भी जुदा हो सकती है
    इस लिए केहते है आओ के कफारा कर लें

    क्या ज़रूरी है के हर रात सितारे आएँ
    रौशनी के लिए जुगनू से शरारा कर लें

    मेरा माज़ी मेरे अमरोज़ का भी है दुश्मन
    और वो कहते हैं के इश्क़ दुबारा कर लें
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    Mohammad Aquib Khan
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    1 Like
    किसी के वास्ते मुश्किल किसी का आसरा दरिया
    मेरी मंज़िल किनारा है मेरा है रास्ता दरिया

    मेरा कोई नहीं है जो मुझे ग़म में दिलासा दे
    यहीं दरिया निकलता है यहीं फिर सूखता दरिया

    तिलिस्मी तुम इशारे कर बुलाओ ना मुझे ऐसे
    मेरा दिल मोम-सा है और मोहब्बत आग का दरिया

    तुम्हारा ही सिला जानम नदी में जो रवानी है
    कभी उस ओर जाना तुम तुम्हें देगा दुआ दरिया

    तेरे बस एक कहने पर सभी को छोड़ आए हम
    मगर अब याद आता है मेरा लश्कर मेरा दरिया

    तुम्हारे बिन हमारा घर बसाना ऐसा है जैसे
    सलाम ए आख़िरी कर के समुंदर में मिला दरिया
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    Mohammad Aquib Khan
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    1 Like
    मेरे टूटे दिल को ज़रा हौसला दो
    हुनर आशिक़ी का मुझे तुम सिखा दो

    भले शौक से तुम अयादत करो पर
    मुझे होश आए ना ऐसी दवा दो

    वो बातें पुरानी, पुराना बहाना
    यक़ीं आए मुझ को नया फलसफा दो

    के मंज़िल को मेरी भले ना चलो तुम
    मुझे लौट जाने का पर रास्ता दो

    दिया मेरे दिल का तुम्हीं से है रौशन
    ये तुमपर ही छोड़ा जला दो बुझा दो

    इन आँखों की बीनाई मुमकिन है लौटे
    के चेहरे से आँचल ज़रा सा हटा दो

    हमारे सुखन कितने हो जाएँ मीठे
    अगर तुम हमारी ग़ज़ल गुनगुना दो

    तेरा लम्स है जैसे नेमत ख़ुदा की
    दरख़्त ए जिगर की ये शाखें हिला दो

    तुम्हारी इबादत कहाँ हम ने कम की
    हमारे भी हक में कभी फ़ैसला दो

    तुम्हारे सितम भी ख़ुशी से सहेंगे
    सज़ा दो, मिटा दो या चाहे दग़ा दो
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    Mohammad Aquib Khan
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