छोड़ आया मैं उसे वो फिर अकेला रह गया
गाँव में बूढ़ा पिता आख़िर अकेला रह गया
गाँव में बूढ़ा पिता आख़िर अकेला रह गया
सब बजा कर तालियाँ सर्कस से हँस कर घर गए
देखते ही देखते साहिर अकेला रह गया
इश्क़ के बाज़ार में बोली दिलों की लग गई
बिक गए सस्ते मेरा नादिर अकेला रह गया
भक्त तेरे पूजते हैं तुझ को देवी मानकर
सब पे तेरा ध्यान है काफ़िर अकेला रह गया
पेट सबका माँगता है एक दो ही रोटियाँसठ तो घर जा चुका क़ासिर अकेला रह गया
मज़हबी बातों के पीछे भाई भाई लड़ रहे
मस्जिदें तन्हा हुई मन्दिर अकेला रह गया
9
7 Likes
मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी
हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की
हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की
6
4 Likes
बहुत बातें हुई हैं ताज़गी की
ग़ज़ल की क़ाफिये की शा'इरी की
ग़ज़ल की क़ाफिये की शा'इरी की
मेरी आँखों ने दिल से बात छेड़ी
हुई चर्चा तुम्हारी सादगी की
हसीं दुनिया में होंगे और भी पर
अलग ही बात है तुझ सुरमई की
तुझे छूने से भी कतरा रहा हूँ
मुहब्ब्त है मेरी पाकीज़गी की
अब इस के बा'द बाक़ी क्या रहेगा
तू मूरत आख़िरी है इस सदी की
4
5 Likes
3
8 Likes
2
11 Likes
सुन पाओगे इस दिल की हर धड़कन को
तुम लग कर तो देखो सीने से मेरे
तुम लग कर तो देखो सीने से मेरे
1
13 Likes










