बिछड़ते वक़्त भी हिम्मत नहीं जुटा पाया
कभी भी उस को गले से नहीं लगा पाया
किसी को चाहते रहने की सज़ा पाई है
मैं चार साल में लड़की नहीं पटा पाया
जितने भी हैं ज़ख़्म तुम्हारे सिल देगी
होटल में खाने का आधा बिल देगी
सीधे मुंह जो बात नहीं करती है जो
तुमको लगता है वो लड़की दिल देगी
कटी उम्र सारी वफ़ा करते करते
किसी की मुहब्बत अदा करते करते
वो थकता नहीं है ज़फा करते करते
मैं थकती नहीं हूं दुआ करते करते
तू है इक़ सुर्ख़ लाल जोड़े में
और क़फ़न में पड़े हुए हैं हम
बस तेरी एक दीद के ख़ातिर
देख कब से खड़े हुए है हम
उम्र भर जिसने न मांगा हो खुदा से कुछ भी
उस ने बस तुम से मोहब्बत की दुआ मांगी है