जिस वहशत ने तुम को है बेकार किया
हम ने उस का सालों कारोबार किया
हम ने उस का सालों कारोबार किया
ख़ाक उड़ाई ख़ूब ख़ुदा की दुनिया में
यूँ ही नइँ इन ग़ज़लों ने सरदार किया
ज़ख़्मों ने है मुझ को गर शोहरत दे दी
या'नी पेड़ ने धूप को भी आहार किया
सब से पहले सुर्ख़ तअल्लुक़ तोड़ दिए
और नज़र को गंगा के उस पार किया
एक तुम्हारी याद ही मेरी साथिन है
माँ कहती है किस को किस को प्यार किया
मैं कहता हूँ बदन ठिकाने लग जाए
दिल कहता है बिल्कुल हाँ सरकार किया
अव्वल आना ही मेरा मुस्तक़बिल है
घर भर में पहला हूँ जिस ने प्यार किया
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मेरी ऐसी हालत है
फिर भी तुम को दिक़्क़त है
फिर भी तुम को दिक़्क़त है
अपनी जिद पे क़ायम हूँ
पागल जैसी हालत है
मेरी चिंता करते हैं
या'नी मुझ से नफ़रत है
मेरे आँसू देखोगे
बोलो इतनी हिम्मत है
दफ़्तर अपना फूँक दिया
आओ बैठो फ़ुर्सत है
दुनिया अपनी फूँक चुके
हाँ अब थोड़ी राहत है
चैन मुझे गर आ जाए
मेरे ग़म पर लानत है
आप बड़े ख़ुश रहते हैं
अपनी अपनी आदत है
ज़ख़्म मुझे भेजा करिए
इस से मुझे मुहब्बत है
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ख़ुदी की शख़्सियत से भागते हो
दिसम्बर की गलन में आग-से हो
दिसम्बर की गलन में आग-से हो
नई पाबंदियाँ हैं लो सुनो सब
अगर हो इश्क़ तो हमज़ात से हो
सुनाई दे रही है जो अज़ल से
उसी आवाज़ के तुम क़ाफ़िये हो
पता महरूम का इक पूछता हूँ
मिरे में शख़्स था इक जानते हो
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