ज़िक्र अब भी मेरा किया होगा
नाम इक मरतबा लिया होगा
नाम इक मरतबा लिया होगा
ग़म उसे ना सहें गए हो जब
जाम पे जाम फिर पिया होगा
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जब से गया है छोड़ कर
ग़म से रहा हूँ तर बतर
ग़म से रहा हूँ तर बतर
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क्यूँ नहीं
मैं ग़म से पूछता
तेरा ख़ुशी से वास्ता क्यूँ नहीं
मोहब्बत भी है
दोनों का एक रास्ता क्यूँ नहीं
जुदा हो कर भी वो मुझ से
ख़ुश क्यूँ ना रहा
वो मुझे दूर कर भी
ख़ुद से क़रीब क्यूँ ना रहा
उलझा रहता था मेरी वजह से
अब मैं नहीं तो वो सुलझा क्यूँ नहीं
Read Fullतेरा ख़ुशी से वास्ता क्यूँ नहीं
मोहब्बत भी है
दोनों का एक रास्ता क्यूँ नहीं
जुदा हो कर भी वो मुझ से
ख़ुश क्यूँ ना रहा
वो मुझे दूर कर भी
ख़ुद से क़रीब क्यूँ ना रहा
उलझा रहता था मेरी वजह से
अब मैं नहीं तो वो सुलझा क्यूँ नहीं
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हौसला रख, देख हंस कर
छोड़ ग़म को, जी ख़ुशी से
छोड़ ग़म को, जी ख़ुशी से
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