जुदाई याद आती है सुकूँ दिन भर नहीं मिलता
मैं जिस को चाहता हूँ वो मुझे अक्सर नहीं मिलता
मैं जिस को चाहता हूँ वो मुझे अक्सर नहीं मिलता
जुदा जब मैं हुआ उन से तो मुझ को ये समझ आया
जो घर पर प्यार मिलता है किसी दर पर नहीं मिलता
ग़लत रस्ता दिखाने को बहुत से लोग मिलते हैं
सही गर रास्ता हो तो कोई रहबर नहीं मिलता
गुज़ारो ग़म के दिन हँसकर मगर ये जान लो यारों
सुकूँ जो रो के मिलता है कभी हँसकर नहीं मिलता
इरादे साफ़ रख कर जो ग़रीबों का भला कर दे
मुझे इस मुल्क में ऐसा कोई लीडर नहीं मिलता
मिला है गर तुझे ’वर्धन’ तो बेशक प्यार करती है
किसी को इतनी जल्दी फ़ोन का नंबर नहीं मिलता
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मेरे दिल में रहने के काबिल नहीं थी
मुझे छोड़कर उस ने अच्छा किया है
मुझे छोड़कर उस ने अच्छा किया है
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तेरे घर को आया सवेरे-सवेरे
ग़ज़ब का सुकूँ था सवेरे-सवेरे
ग़ज़ब का सुकूँ था सवेरे-सवेरे
उसे आज़माना था बस इश्क़ मेरा
मुझे आज़माया सवेरे-सवेरे
इरादा था तुझ को भुलाने का लेकिन
तू ही याद आया सवेरे-सवेरे
मेरी जाँ क़सम से, परेशाँ था मैं तो
तेरा ख़त जलाया, सवेरे-सवेरे
तेरा साथ छूटा, तो यारों ने मेरे
गले से लगाया, सवेरे-सवेरे
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