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ज़माना धूप से गुज़रा ज़माना शाम से गुज़राहमारे इश्क़ का क़िस्सा हमारे नाम से गुज़रासुनी फिर से कहानी जो हमारे दूर जाने कीसुहाना दिन हमारा फिर पुराने जाम से गुज़रा
पुराने ज़ख्म कर डाले हरे सबजला कर के नई तस्वीर उसकी
तुझे छूकर अभी तक होश में हूँकमी कोई कहीं तो रह गयी है
पिलाओ जाम फिर से तुम उसी के नाम का मुझकोजिसे दिल में उतारे एक 'अर्सा हो गया है अब
ख़ास ख़ुशबू शर हवा में आ रही हैफूल कोई फिर दुआ से खिल गया है
शायरी उसको समझ आती नहीं हैमैं फक़त ये शेर लिखता जा रहा हूँ
आज उस को कुछ दिनों के बाद देखाइस क़दर देखा कभी देखा नहीं था
मैं मोहब्बत में अभी वादा करूँ तोबाद में तुम राब्ता मुझसे करोगी
डाल भी करती रही वादा ख़िलाफ़ी पेड़ का पूरा भरोसा ख़ाक करके
तुम मुझे नश्तर दिखाई देती हो क़त्ल कितनों का किया तुमने अब तक