सुनता नहीं ये दिल मेरी कोई भी बात अब
मुझ से ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब
मुझ से ख़फ़ा हुए हैं ये दिन-और-रात सब
कह दे कि तेरी सोच में मैं इक ख़याल हूँ
कह दे तू छोड़ती हूँ मैं भी तेरा साथ अब
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आने का वा'दा करो ऐसे न इनकार करो
है अगर इश्क़ तो फिर इश्क़ का इज़हार करो
है अगर इश्क़ तो फिर इश्क़ का इज़हार करो
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दिल में लगेगा शे'र मेरा तीर की तरह
मैं भी ग़ज़ल कहूॅंगा कभी मीर की तरह
मैं भी ग़ज़ल कहूॅंगा कभी मीर की तरह
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